Friday, March 22, 2019

अगर ये सोया तो इसकी मौत हो जाएगी

नींद हर इंसान के जिंदा रहने के लिए बहुत ही जरूरी है अगर आप सोना छोड़ देते हो तो आप ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह पाओगे लेकिन क्या हो अगर मैं आपको यह बताऊ कि इस दुनिया में ऐसी भी बीमारी है जिसकी वजह अगर वह मरीज सोता है तो वह मर जाएगा मतलब अगर कोई नॉरमल इंसान ना सोए तो वह मर जाएगा लेकिन अगर किसी को यह बीमारी है और अगर वह सो जाए जिंदगी भर के लिए सोता ही रह जाएगा


यह हे लियम डर्बीशायर इसे कौनजेनिटल सेंट्रल हाइपोवेंटिलेशन सिंड्रोम है यह एक ऐसा डिसऑर्डर है जो आपके ब्रिथिंग को इफेक्ट करता है स्पेशली तब जब आप सो रहे होते हो या फिर अनकॉन्शियस होते हो यह बीमारी इतनी रेयर है कि पूरी दुनिया में इसके केवल 1500 से भी हम केसेस मौजूद हैं इस बीमारी का नाम हाइपोवेंटिलेशन के ऊपर पड़ा है हाइपोवेंटिलेशन का मतलब बहुत ही थोड़ी थोड़ी मात्रा में सांस लेना होता है जब कोई इंसान बहुत थोड़ी थोड़ी सांस लेता है तो उसके खून में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है और कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने लगती है |
सांस लेना, दिल का धड़कना, या आपकी की पलके झपकना क्या यह सारी चीज है आप जानबूझकर करते हो नहीं ना यह सभी चीजें अनकॉन्शियसली आपका दिमाग नर्वस सिस्टम की मदद से आप से करवाता है और आपको पता भी नहीं चलता इसी नर्वस सिस्टम को ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम कहते हैं

यह उन सभी प्रोसेस को कंट्रोल करता है जिसमें हमारे कॉन्शसनेस की जरूरत नहीं होती जैसे सांस लेने में, अब सीसीएचएस के केस में यही नर्वस सिस्टम आप की ब्रिथिंग प्रोसेस को कंट्रोल नहीं कर पाता उन्हें सांस लेने के लिए किसी एक्सटर्नल मेडिकल वेंटीलेशन सिस्टम का इस्तेमाल ना पड़ता है इस बीमारी की वजह है शरीर के फॉक्स टू बी नाम के जींस में म्यूटेशन, यानी जब इस जीन्स में चेंजेज आते है तो उसकी वजह से आपको यह बीमारी लग जाती है फॉक्स टू बी या पेयर्ड लाइक होम्यो बॉक्स 2 बी वह जीन है जो प्रोटींस बनाने में मदद करता है, और यही प्रोटीन नए नर्व सेल्स की फॉरमेशन में मदद करते है यही नर्सेज इनफॉरमेशन को आपके दिमाग से बॉडी के अलग-अलग पार्ट में लेकर जाते हैं इस केस में किसी करते है किसी को 24 घंटे वेंटीलेशन में रहना पड़ता है


लेकिन लिएम के केस इसकी जरूरत केवल रात में सोते वक्त ही पड़ती है लिएम की यह बीमारी पैदाइशी है जब उसका जन्म हुआ था तो डॉक्टर ने बोल दिया था कि यह केवल 6 महीने तक जिंदा रह पायेगा लेकिन इसके घर वालों ने हार नहीं मानी और उसे जिंदा रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश करी और आज लियाम लगभग 18 साल का हो चुका है अब आपका और मेरे दिमाग ऑटोनॉमिक नर्वस सिस्टम तो बिल्कुल ठीक है इसीलिए चाहे जो हो जाए भले ही हम अनकॉन्शियस हालत में क्यों ना हो लेकिन हमारा दिमाग सांस लेना या दिल के धड़कने जैसी छोटी छोड़ बातों पर ध्यान नहीं देता लेकिन लिएम के केस में जैसे ही वह अनकॉन्शियस होगा या नहीं जैसे ही वह सोएगा उसका दिमाग उसकी बॉडी को सांस लेने का सिग्नल भेजना बंद कर देगा इसलिए अगर वह बिना इस मशीन का इस्तेमाल किए सोता है तो वह जिंदा नहीं बच पाएगा


शायद अब आप का सवाल होगा कि अगर वह इस मशीन के बिना सोता है तो सोते वक्त जैसे ही उसे साँस बंद हो जाएगी तो वो अपने आप उठ जाएगा सिंपल और फिर से उसकी सांसे चलने लगेंगी तो वह बिना इस मशीन के सोने पर मर कैसे जाएगा वेल ऐसा तभी होता जब उसका नर्वस सिस्टम नॉरमल रहता मेरे और आपकी तरह तब उसकी बॉडी को सांस लेने से कोई भी नहीं रोकता उसके अनकॉन्शियस होने के बाद भी उसका दिमाग लगातार बॉडी को ये सिग्नल देता रहता कि सांस लेना है और इस कंडीशन में अगर उसकी बॉडी साथ नहीं ले पाती तो वह उठ जाता लेकिन इस बीमारी के चलते जैसे ही उसका दिमाग बंद होगा तो वो अपने नर्वस सिस्टम के थ्रू यह सारे सिगनल्स भेजना बंद कर देगा और सांस लेने का सिग्नल ना मिलने पर उसकी बॉडी सांस नहीं मिलने पर भी रियेक्ट नहीं करेगी और बिना का दम घुट है वह मर जाएगा इस बीमारी में लोगों का ब्लड प्रेशर और हर्ट रेट भी अबनॉर्मल रहता है और तो और उनके डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में भी प्रॉब्लम आ सकती है जिसकी जैसे उनके खाने-पीने और उसे पचाने में भी काफी ज्यादा प्रॉब्लम होती है लिएम को रोज स्पेशल खाना खिलाया जाता है उसके अकेले के 1 महीने का खाने का खर्चा करीब ₹100000 से भी ज्यादा है अपने आसपास नॉरमल लोगों को देख देख कर उसे काफी बुरा लगता है कि केवल उसके साथ ही ऐसा क्यों हुआ यही सब सोच सोच कर अब उसके दिमाग की हालत उसकी उम्र के लोगों जैसी नहीं रही लिएम को लीगो कंस्ट्रक्शन का बहुत शौक है


आपने भी बचपन में इन ब्लॉक्स को अलग अलग तरीके से लगाकर अलग-अलग डिजाइन बनाये होंगे लिएम को भी यह सब करना बहुत पसंद है उसे जिंदा रखने वाली मशीन के अलावा उसके कमरे में लिखो और मॉडल ट्रेंस मौजूद है जिससे वह खेलता रहता है डॉग के पास अभी भी इस बीमारी का इलाज नहीं है मैं इस पर बहुत सारी रिसर्च अभी करी जा रही हैं लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस इलाज किसी भी ऑर्गेनाइजेशन के पास नहीं है


आपको क्या लगता है की साइंस इस बीमारी का इलाज आगे फ्यूचर में ढूंढ लेगा कमेंट बॉक्स में अपनी राये जरूर दे और हां हमें फॉलो जरूर करे इसी तरह की इंट्रेस्टिंग पोस्ट्स आती रहेगी धन्यवाद !
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